एकसाथ हम रहे एकसूत्र हम बंधे
भिन्नभिन्न है प्रथा एकता ही ध्येय है।।धृ.।। -- 2
सूर्यदेव एक है चन्द्रमा भी एक है।
विविध तारकाओंका गगनमण्डलेक है। -- 2
भिन्नरुप देवता एकरुप योग है।
योगमार्ग नाना मात्र प्रकृती अद्वैत है। -- 2
भाषा प्रांत भिन्न मात्र संस्कृती अभिन्न है।
शाखा भिन्न विषय भिन्न संघरुप शक्ती है। -- 2